“गुफ्तगू” #2Liner-82

ღღ__वो तो अहद-ए-वफ़ा की खातिर, तुमसे मिलता रहा हूँ साहब;
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वरना गुफ्तगू…..वो भी तुमसे…..क्या मज़ाक करते हो!!….‪#‎अक्स‬
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3 Comments

  1. Panna - March 30, 2016, 10:54 am

    behatreen janaab!

  2. Pragya Shukla - April 19, 2021, 12:34 pm

    बहुत सुन्दर रचना

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