“तुमसे गले मिले हुए” #2Liner-56

ღღ__यूँ तो अरसा हुआ है साहब, तुमसे गले मिले हुए;
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पर जिस्म मेरा आज भी, इत्र-सा महकता है !!……#अक्स
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“ख़त” #2Liner-102

ღღ__यूँ भी कई बार “साहब”, मोहब्बत का सिला मिला मुझे; . कि मेरे ख़त के जवाब में, मेरा ही ख़त मिला मुझे!!…..#अक्स

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