न्याय

ना कोई मुकदमा, ना कोई सुनवाई।
ना कोई चीख पुकार, ना कोई दुहाई।
तुरंत फैसला और मौके पर ही न्याय,
दुष्कर्म के ख्याल से ही रूह काँप जाए।

देवेश साखरे ‘देव’


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15 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - December 7, 2019, 7:24 am

    सुंदर

  2. Neha - December 7, 2019, 1:22 pm

    good one devesh ji

  3. Abhishek kumar - December 8, 2019, 9:21 am

    Good

  4. Poonam singh - December 8, 2019, 3:40 pm

    Good

  5. Pragya Shukla - December 9, 2019, 8:44 pm

    सुन्दर

  6. Abhishek kumar - December 14, 2019, 5:41 pm

    सुन्दर रचना

  7. Abhishek kumar - December 21, 2019, 10:19 pm

    Superb

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