बेरोजगारी

आईने तू इस तरह से
मत दिखा तो शक्ल मेरी
इन दिनों यौवन में हूँ
चिंताएं मेरी लाजमी हैं।
सोचता था मैं, कड़ी
मेहनत से तारे तोड़ लाऊं।
लेकिन यहां तो सारे पथ
हैं बन्द कैसे लक्ष्य पाऊं।
हर तरफ छाया अंधेरा
कल की चिंताओं ने घेरा,
घेर कर बेरोजगारी
तोड़ती उत्साह मेरा।
अब बता तू ही कि कैसे,
मैं चमक जीवित रखूं
कुछ नहीं कर पा रहा हूं,
किस तरह आगे बढूं।


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20 Comments

  1. Devi Kamla - September 20, 2020, 9:07 am

    अति सुन्दर, बहुत खूब

  2. Ramesh Joshi - September 20, 2020, 9:46 am

    बहुत सच लिखा है, वाह जी

  3. Geeta kumari - September 20, 2020, 12:59 pm

    एक तो कोरोना की महामारी, उपर से बेरोज़गारी , कैसे कोई ख़ुश रहे
    देश दुनिया पे जैसे आफत सी आ गई है ।बेरोज़गारी युवा वर्ग की चिंता का विषय बना हुआ है ।
    बेरोज़गारी की समस्या पर प्रकाश डालती हुई बहुत शानदार रचना ।

    • Satish Pandey - September 26, 2020, 6:08 pm

      आपकी लेखनी से निकली समीक्षा उत्साहवर्धक है। भाव को समझने व विश्लेषण करने हेतु सादर अभिवादन।

  4. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - September 20, 2020, 1:29 pm

    अतिसुंदर रचना शतप्रतिशत यथार्थ

  5. Suman Kumari - September 20, 2020, 4:50 pm

    आपकी रचना समकालीन यथार्थ पर आधारित है ।
    जो हो रहा उस हुबहू शब्दों के माध्यम से वयक्तकिया है ।
    सराहनीय

    • Satish Pandey - September 26, 2020, 6:10 pm

      आपके द्वारा की गई इस बेहतरीन समीक्षा हेतु आभार व्यक्त करता हूँ।

  6. Pragya Shukla - September 20, 2020, 7:45 pm

    Beautiful

  7. MS Lohaghat - September 20, 2020, 9:06 pm

    बहुत ही बढ़िया

  8. Chandra Pandey - September 20, 2020, 9:08 pm

    बहुत ही सुन्दर

  9. Isha Pandey - September 21, 2020, 3:32 pm

    Nice, true lines

  10. Kamal Pandey - September 26, 2020, 8:18 pm

    Very true fact

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