बज़्म

जीने को यूँ जीती हूँ जैसे
कोई गुनाह किये जा रही हूँ मैं।
गीत भी गा रही हूँ,
ईद भी मना रही हूँ।
ज़िन्दगी की बज़्म फ़िर सजा रही हूँ मैं।


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19 Comments

  1. देवेश साखरे 'देव' - December 24, 2019, 10:54 am

    वाह

  2. Pragya Shukla - December 24, 2019, 11:09 am

    थैंक यू

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - December 24, 2019, 12:26 pm

    बढ़िया

  4. Rajendra Dwivedi - December 24, 2019, 1:35 pm

    बहुत खूब

  5. Rajendra Dwivedi - December 24, 2019, 2:00 pm

    वाह क्या बात

  6. Kanchan Dwivedi - December 24, 2019, 6:50 pm

    Wah

  7. Ajay agrahari******* - December 24, 2019, 7:32 pm

    Hello

  8. Abhishek kumar - December 25, 2019, 10:08 am

    Superb

  9. Kanchan Dwivedi - December 25, 2019, 12:57 pm

    Hello ajay ji

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