महात्मा गांधी

ना उठाया शस्त्र कभी ना हिंसा अपनाई थी ,
अंत समय पर उनके राष्ट्र में खामोशी छाई थी ;
सौराष्ट्र प्रांत का संत वहां था ,
राष्ट्रप्रेम उसका अनंत था ;
देकर आजादी बापू कहलाया ,
आजादी का गान है गाया ;
सत्ता का न लोभ उसे था ,
राष्ट्रपिता का दर्जा पाया ;
विश्वकल्याण स्वप्न था उसका ,
निर्मल अंतर्मन था उसका ;
जीवन समर्पित किया देश को ,
किया नमन सदैव अवधेश को ।
सत्याग्रह,असहयोग पर दिया था उसने जोर ;
सतत प्रयास के फलस्वरूप हुई थी आजादी की भौर रघुपति राघव गाता था वो,
चरखा सदा चला था वो;
स्वावलंबी था वह मानव ,
नहीं रोक पाया कोई दानव ;
अंग्रेजों को रोका जिसने ,
वही राष्ट्रपिता है कहलाया ।

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7 Comments

  1. राम नरेशपुरवाला - September 20, 2019, 8:37 pm

    देशभक्ति पूर्ण

  2. NIMISHA SINGHAL - September 20, 2019, 10:57 pm

    अच्छी कविता

  3. Poonam singh - September 21, 2019, 11:15 am

    Nice

  4. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 21, 2019, 3:02 pm

    वाह बहुत सुन्दर

  5. Lavansh Parmar - September 27, 2019, 5:50 pm

    Bahut badai
    Itni umer e itna Accha pradarshan

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