महात्मा गांधी

ना उठाया शस्त्र कभी ना हिंसा अपनाई थी ,
अंत समय पर उनके राष्ट्र में खामोशी छाई थी ;
सौराष्ट्र प्रांत का संत वहां था ,
राष्ट्रप्रेम उसका अनंत था ;
देकर आजादी बापू कहलाया ,
आजादी का गान है गाया ;
सत्ता का न लोभ उसे था ,
राष्ट्रपिता का दर्जा पाया ;
विश्वकल्याण स्वप्न था उसका ,
निर्मल अंतर्मन था उसका ;
जीवन समर्पित किया देश को ,
किया नमन सदैव अवधेश को ।
सत्याग्रह,असहयोग पर दिया था उसने जोर ;
सतत प्रयास के फलस्वरूप हुई थी आजादी की भौर रघुपति राघव गाता था वो,
चरखा सदा चला था वो;
स्वावलंबी था वह मानव ,
नहीं रोक पाया कोई दानव ;
अंग्रेजों को रोका जिसने ,
वही राष्ट्रपिता है कहलाया ।

Published in हिन्दी-उर्दू कविता

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