माँ

तुम शान थी मेरी ,
तुम मान थी मेरी ,
तुम अभिमान थी मेरी ,
इस दुःख भरी दुनिया में ,खुशियों की पहचान थी मेरी !
जब इस दुनिया में आयी ,पहचान कराया माँ तमने ,
परिवार में बेटो के चाह में पागल ,
पर मैं बेटो से कम नहीं यह स्थान दिलाया तमने !
बचपन से बेटो बेटियों की भेद भाव की सीडी देख बड़ी हुई ,
पर तुम हर सीडी के बिच खड़ी हुई ,
मेरी बेटी बेटो से कम नहीं इस बात पे तुम अड़ी रही !
आज भी याद है माँ स्कूल का वो पहला दिन
कैसे कटे थे हर घड़ी माँ तेरे बिन !
उस कड़कती धूप में , वो बरसती सावन में
माँ तमने मेरा साथ दिया हर उस उत्सव पवन में !
चाँद सितारों से हस्ती खेलती वो गलिया,
कितनी प्यारी थी ना माँ हमारी वो दुनिया !
कैसे गुज़रे वो हसीन से पल ,
आज लगता है बचपन तो था कल !
माँ की बिटिया आज सायानी हो गयी ,
छोड़ अपना घर किसी की बहुरानी हो गयी !
आज समझ आया कैसे कर लेती थी माँ इतना काम ,
घर , आंगन की मालकिन पाती जग का सम्मान !
हर पथ पे साथ दिया माँ तमने मेरा ,
फिर क्यों जा रही छोड़ साथ मेरा !
फिर क्यों आ रही माँ हर बात याद तेरी ,
वो प्यारी मुश्कान तेरी, वो बिटया रानी कहना मेरी!
लगता है उस खुदा की प्यारी हो माँ ,
जिसने इतनी जल्दी बुला लिया तम्हे आसमां !
उस रब से मेरी है ये दुआएँ ,
मेरी माँ की झोली में खुशिया ही सदा बरसाए !
भूल नहीं सकती माँ तेरे करम को जब तक हु ,पूजा करुँगी तेरी चरण को !
ये खुदा एक छोटी सी मेरी है तमन्ना ,
जब ,जब दुनिया में आउ उसकी आखो से ही देखु जमाना !

…………..सौंदर्य निधि ……………………

Published in हिन्दी-उर्दू कविता

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