मैं खुद से भी ज़्यादा बेहतर..

‘सबसे पहले मैं दुनियाँ में
इस रिश्ते को पहचानती हूँ..
मैं खुद से भी ज़्यादा बेहतर,
अपने पापा को जानती हूँ..

वो कहते हैं कि जान मेरी,
मेरी गुड़िया में बसती है..
मैं कहती हूँ कि बस पापा
इक आप से मेरी हस्ती है..
बस वही जगह है उनकी भी,
जितना मैं रब को मानती हूँ..
मैं खुद से भी ज़्यादा बेहतर,
अपने पापा को जानती हूँ..

‘तू लाई क्या है मायके से’,
यह तीर हृदय को भेद गया..
न खुशियों से प्रफुल्ल हुआ,
न कभी ये मन से खेद गया..
ससुराल के ऐसे तानों को,
अच्छी बातों से छानती हूँ..
मैं खुद से भी ज़्यादा बेहतर,
अपने पापा को जानती हूँ..

वो खुद जो पैदल चलते थे,
उन्होंने आपको गाड़ी दी,
जीवन में जो भी सहेजा था,
वो मेहनत अपनी गाढ़ी दी,
अब उनके पास नही है कुछ,
यह बात हृदय से जानती हूँ..
मैं खुद से भी ज़्यादा बेहतर,
अपने पापा को जानती हूँ..’

#दहेजप्रथा

– प्रयाग

Comments

27 responses to “मैं खुद से भी ज़्यादा बेहतर..”

  1. वाह वाह, बहुत खूब

    1. आभार आपका

  2. बहुत सुन्दर

    1. बहुत शुक्रिया

  3. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति
    पिता बेटी के मधुर प्रेम को प्रकट करती हुई सुंदर प्रस्तुति
    एक पिता अपनी पूरी जिंदगी अपनी बेटी का जीवन खुशहाल बनाने के लिए लगा देता है मगर दहेज के लोभियों का मुह दानव से भी ज्यादा लंबा और चौड़ा है जो हमेशा खुलता रहता है

    1. उत्प्रेरक समीक्षा के लिए आपका आभार

    1. जी बहुत शुक्रिया आपका

  4. This comment is currently unavailable

    1. आभार आपका

  5. बहुत ही सुन्दर पंक्तियाँ ।

    1. बहुत बहुत आभार आपका

  6. Geeta kumari

    ससुराल में सबने पूछा ,बहू दहेज़ में क्या लाई,
    किसी ने ये नहीं देखा, एक बेटी क्या – क्या छोड़ के आई…
    बहुत अच्छी कविता लिखी है।आपकी लेखनी को प्रणाम🙏

    1. कविता के मर्म तक पहुँचने के लिए आपका आभार

      1. Geeta kumari

        सुस्वागतम् 🙏

    2. Satish Pandey

      गीता जी की समीक्षा शक्ति भी काबिलेतारीफ है, सैल्यूट

      1. मैं भी आपसे पूरी तरह सहमत हूँ सर

      2. बहुत बहुत धन्यवाद आपका 🙏

  7. Satish Pandey

    आपने सत्य को उजागर करने में भरपूर सफलता पाई है। वाकई ससुराल में पूछा जाता है, कि क्या लेकर आई है। यह नहीं देखा जाता कि बचपन से लेकर अब तक का पूरा संसार ही छोड़ कर आई है।

    1. जी बहुत शुक्रिया सर

    2. जी बिल्कुल यही तो विडम्बना है।

  8. Priya Choudhary

    कितनी मोहक कविता है बहुत सुंदर

    1. Prayag Dharmani

      सादर धन्यवाद आपका

    1. Prayag Dharmani

      शुक्रिया आपका

  9. Pratima chaudhary

    Very nice lines

    1. Prayag Dharmani

      🙏🙏

Leave a Reply

New Report

Close