मोर मन के परेवना

मोर मनके परेवना
★★★★★★★

कोयली कस कुहकत जीवरा के मैना न |
महकत अमरैय्या गोंदा तय फूले जोहि ||

मोर मन म बसे हिरदे के परेवना ओ |
संगी घलो हर झूमत नजरे नजर म न ||

लाली कस परसा दिखत रुपे ह तोरे ओ |
दिखत रिकबिक घलो टिकली सिंगारे ह ||

तोरेच आगोरा म जीवरा ह संगवारी न |
कलपत हिरदे हावे रतिहा आगोरा ओ ||

नइ मिले थोड़कुन आरो ह तोरेच जोहि |
मन मे पीरा घलो मन कुमलाये भारी न ||

तिहि मोर परेवना अस सुवा तय मोर घलो |
आसा मोर मनके घलो हिरदे के जीवरा ओ ||

दगा झन दे मोला बगिया के गोंदा ओ |
पीरा हिरदे म हावे घलो मन ह भारी न ||

तेहर तो जल्दी आजा मोर तय परेवना ओ |
तोरेच आगोरा म हिरदे हर जुड़ावत हावे ||
योगेश ध्रुव”भीम”


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4 Comments

  1. Pragya Shukla - May 10, 2020, 9:42 pm

    Good

  2. Abhishek kumar - May 10, 2020, 10:14 pm

    👏👏

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - May 11, 2020, 7:44 am

    Nice

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