याद हैं वो गुजरे जमाने!!

याद हैं वो गुजरे जमाने
तुमको?
जब प्रीत से बढ़कर
और कुछ भी न था।

याद हैं वो गुलिस्ता मुझको
जहाँ तेरे और मेरे सिवा
कुछ भी न था।

कुछ दूर खड़े तुम थे
कुछ दूर खड़े हम थे,
याद है क्या तुमको
मेरी बाँहों में आना?

आज़ादियां कहां अब
तेरे मेरे मिलन की,
तेरा नज़र उठाना
मेरा नज़र झुकाना।

बरसात की वो बूंदें
और तेरा भीग जाना,
तेरे ही दम से खुश था
मेरे दिल का आशियाना।


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11 Comments

  1. Abhishek kumar - June 5, 2020, 1:46 pm

    सुन्दर रचना

  2. Master sahab - June 5, 2020, 1:48 pm

    मार्मिक चित्रण 👏👏👏

  3. Praduman Amit - June 5, 2020, 6:12 pm

    आपकी कविता पढने के बाद गुजरे पल याद आ गए।

  4. Panna - June 6, 2020, 12:45 pm

    बहुत खूब

  5. Abhishek kumar - July 13, 2020, 12:00 am

    👏👏

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