“याद” #2Liner-22

ღღ__इस कदर भी याद, ना आया करो “साहब”;
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मेरी खुशियों की नींद में, खलल पड़ता है !!…….‪#‎अक्स‬
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“अजनबी” #2Liner-18

ღღ__हमको सताने के मौके, वो छोड़ते नहीं हैं “साहब”; . कल ख़्वाब में भी आए, तो अजनबी बनकर !!…….‪#‎अक्स . www.facebook.com/अन्दाज़-ए-बयाँ-with-AkS-Bhadouria-256545234487108/

“ख्वाहिशें” #2Liner-24

ღღ__शायद ये आँखें मूँद लेने का, सही वक़्त है “साहब”; . कि रोज़ ख्वाहिशों का मरना, हमसे अब देखा नहीं जाता !!……‪#‎अक्स‬ . www.facebook.com/अन्दाज़-ए-बयाँ-with-AkS-Bhadouria-256545234487108/

“बेबसी” #2Liner-23

ये सर्दियों का मौसम, और ये तन्हाईयों का आलम; . कहीं जान ही ना ले-ले, इनसे मिलके बेबसी मेरी !!……‪#‎अक्स‬ . www.facebook.com/अन्दाज़-ए-बयाँ-with-AkS-Bhadouria-256545234487108/

देश दर्शन

शब्दों की सीमा लांघते शिशुपालो को, कृष्ण का सुदर्शन दिखलाने आया हूं,                                  मैं देश दिखाने आया हूं।। नारी को अबला समझने वालों को, मां…

Responses

      1. ख़िताब चाहें कितना भी छोटा क्यों ना हो ….उसे पाने के बाद …
        होने वाली ख़ुशी हमेशा बड़ी होनी चाहिए…

      2. ℘___मंजिल को जाने क्या हुआ कदमों में आ गई,
        मैं रास्ते का लुत्फ.. उठाने से रह गया____℘

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