वो कौन थी..

वो गोरी भी ना थी,
ज्यादा सुंदर भी ना थी,
ना देती थी प्रेम कभी,
फ़िर भी वो योग्य बहुत थी
कदम से कदम मिलाती थी
वो साथ मेरे आती जाती थी
मैं चाहता तो रुकती थी
मैं चाहता तो चलती थी
मंदिर में आने से करती थी इन्कार
पर बाहर मेरा करती थी इन्तजार
वो………………………………………..
जैसी भी थी, चप्पल थी मेरी……
ना जाने कौन उठा कर ले गया ।


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25 Comments

  1. Chandra Pandey - September 20, 2020, 6:49 pm

    वाह वाह बहुत ही उत्तम रचना

  2. Devi Kamla - September 20, 2020, 6:53 pm

    Wow ग्रेट

  3. Geeta kumari - September 20, 2020, 6:54 pm

    समीक्षा के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद चंद्रा जी🙏

  4. Praduman Amit - September 20, 2020, 7:21 pm

    बहुत ही सुन्दर भाव है

  5. Pragya Shukla - September 20, 2020, 7:42 pm

    बहुत खूब दी

  6. Satish Pandey - September 20, 2020, 7:57 pm

    क्या शानदार लेखनी है। चप्पल का इतना जबरदस्त मानवीकरण किया गया है कि कुछ कहते नहीं बन पा रहा है। बहुत अच्छी प्रतिभा है, keep it up, रुकना नहीं , चलते जाना है। वाह

    • Geeta kumari - September 20, 2020, 8:04 pm

      इतनी सुन्दर समीक्षा के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी ।🙏
      कविता के भाव को समझने के लिए आपका बहुत शुक्रिया और आभार। आपकी प्रेरक समीक्षाएं हमेशा ही मेरा मार्ग दर्शन करती हैं ।

  7. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - September 20, 2020, 8:41 pm

    अतिसुंदर रचना

  8. MS Lohaghat - September 20, 2020, 9:04 pm

    बहुत ही बढ़िया हास्य रचना, ग्रेट

    • Geeta kumari - September 20, 2020, 9:18 pm

      समीक्षा के लिए बहुत बहुत धन्यवाद सर 🙏

  9. Piyush Joshi - September 20, 2020, 10:26 pm

    सुन्दर, उम्दा

    • Geeta kumari - September 21, 2020, 7:11 am

      बहुत बहुत धन्यवाद पीयूष जी🙏 समीक्षा हेतु आभार

  10. प्रतिमा चौधरी - September 20, 2020, 11:21 pm

    शुरुआत कुछ और अन्त में कुछ और
    मतलब पहले लगा कि प्रेमिका के लिए भाव है किन्तु बाद में हंसी भी आई और चप्पल की चोरी होने का दुख भी हुआ 😊👌
    बहुत सुंदर प्रस्तुति गीता मैम
    मानवीकरण का सुन्दर प्रयोग

    • Geeta kumari - September 21, 2020, 7:16 am

      सुन्दर समीक्षा हेतु आपका बहुत बहुत धन्यवाद प्रतिमा जी । भाव समझने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ।यही तो इस कविता में twist था।
      आपको हंसी आई बहुत अच्छा लगा। ऐसे ही हमेशा ख़ुश रहें । चप्पल के मानवीकरण की हास्य कथा ही थी। बहुत बहुत धन्यवाद 🙏

  11. Indu Pandey - September 23, 2020, 9:49 am

    बहुत सुंदर हास्य रचना

  12. Geeta kumari - September 23, 2020, 11:38 am

    अरे वाह इंदु जी आपको मेरी रचना से हंसी आई इसके लिए आपका हार्दिक धन्यवाद 🙏

  13. Seema Chaudhary - September 24, 2020, 9:15 pm

    वाह चप्पल का बहुत सुंदर मानवीकरण । सुंदर हास्य रचना

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