आज हमारी टक्कर है

लड़का – मैं वो आशिक़ नहीं जो अपनी,
फ़ितरत को धूल में मिला दे।
गर यकीन न हो तो एक मर्तबा,
दिल दे के तू मुझे अपना बना ले।।
💇 — अपना दिल ए पागल आशिक़,
तुझे ऐसे कैसे हवाले कर दूँ ।
लाख जतन से संभाला यौवन को,
बदल जाता है तू कैसे यकीन कर लूँ।।
लड़का – तेरा यौवन किस काम का जो किसी,
आशिक़ के कांतिल निगाह न पड़े।
लाख बचा ले तू अपना दामन,
फिर भी दीवानो से तू कैसे बचे।।
💇 ——तेरे जैसे कई आशिक़ आ कर चले गए,
मेरे हुस्न की आग ही कुछ ऐसी है।
तू मुझ पे क्या जादू चलाएगा,
तेरा ईमान ही बेईमान है।।
लड़का —मेरे ईमान पे नश्तर चलाने वाली,
कम से कम खुदा से तो डर।
माना कि ज़माने की डोर तेरे हाथों में हैं,
फुर्सत से बनाने वाले से तो डर।।
💇 —–हम कब नहीं थे तुम्हारे ए नादान,
तू हर मर्तबा छलने का काम ही किया।
गर तू करता है मुझ से सच्ची मुहब्बत,
जा क्या याद करेगा, यह शाम तेरे नाम किया।।

Comments

5 responses to “आज हमारी टक्कर है”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    अतिसुंदर भाव

  2. Pratima chaudhary

    Nice

  3. सुन्दर अभिव्यक्ति

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