आदर्श

आदर्श के बल पर ही टीका है संसार,
आदर्श से ही चल रहा रिति व्यवहार।
नजर खतरों का अबइशारा हो गया,
नजर से नजर मिला कर धोखाधड़ी कर रहा।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

Comments

7 responses to “आदर्श”

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  2. त्रुटियाँ हैं पर भाव अच्छे हैं

  3. Satish Pandey

    टिका है संसार
    Good

  4. आदर्श का हमारे जीवन में बहुत आदर्श का हमारे जीवन में बहुत हीमहत्त्व है

  5. सुंदर पंक्तियां

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