आशियाना ढूँढ रही हूँ
इस प्रकृति के संसार में ।
कहीं तो होगा मेरा आशियाना
इस हरे भरे संसार में ।।
बरसात से दोस्ती कर ली
धूप से जोड़ा नया रिश्ता ।
जब ठंड में सकुरा बदन
तब सुर्य बनता है हमारा फरिश्ता।।
आशियाना

Comments
6 responses to “आशियाना”
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पक्षियों पर लिखी गई बहुत सुन्दर रचना
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स्वागतम।
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सुन्दर प्रस्तुति
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स्वागतम
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सुन्दर
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जय हो
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