आ गया तेरा भाई…!

आज बहुत व्यथित थी
बार-बार निगाहें दरवाज़े
तक जाकर लौट आ रही थीं….
ना जाने कहाँ रह गए वो!
मेरा बेचैन मन
मुझे अधीर कर रहा था….
कहा तो था जल्दी ही
आ जाऊंगा
ना जाने कहाँ रह गए वो!
जितनी बार गली से
कोई आहट आती
मन की गति से भी जोर
मैं भागती
दरवाज़े पर निहारती
और हताश होकर
लौट आती…
ना जाने कहाँ रह गए वो!
तभी बाहर से आवाज आई
कहाँ हो बहना!
मन प्रसन्नता से
झूम उठा
आँखों में चमक आई
मेरी बेचैनी ने
मुझे छोंड़कर जाते हुए कहा
लो आ गया तेरा भाई…

Comments

23 responses to “आ गया तेरा भाई…!”

  1. Geeta kumari

    अरे वाह, बहुत सुंदर रचना।भाई – बहन के स्नेह को दर्शाती हुई बेहद खूबसूरत

    1. इतनी सुन्दर समीक्षा के लिए धन्यवाद

  2. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    अतिसुंदर भाव

  3. सुन्दर अभिव्यक्ति

  4. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    सुन्दर अभिव्यक्ति

    1. Pragya Shukla

      आपकी समीक्षा मेरा हौसला बढ़ाती है
      वर्ना मैं कुछ भी नहीं

  5. Prayag Dharmani

    सरल सहज भाव के साथ भावपूर्ण प्रस्तुति

    1. आपका बहुत बहुत आभार

  6. This comment is currently unavailable

  7. सुन्दर भाव

    1. Pragya Shukla

      आभार आपका

  8. Rishi Kumar

    किस्मत वालों को प्यार मिलता है
    नसीब वालों को साथ मिलता है
    बहुत ही अनकहे किस्से हैं बचपन के
    ढूंढो उसी में अपना भी प्यार मिलता है|

    क्या जरूरत थी बढ़कर पीछे जाना,
    क्या जरूरत थी कुछ ऐसी बातें कहना|
    पवित्र प्यार होता है बहन भाई का,
    रोक पाए ना इसे कोई जमाना|

    बहुत खूबसूरत रचना
    ✍✍👌✍✍✍✍✍✍

  9. Pragya Shukla

    इतनी सुन्दर समीक्षा के लिए शुक्रिया आपका
    आप हमेशा मेरा उत्साह वर्धन किया करते हो

  10. Priya Choudhary

    Bhut sunder 👏👏👏👏👏

    1. Pragya Shukla

      thank you so much Priya Tumhara reply Dekhkar Man Ko tasalli Hui

      1. Priya Choudhary

        😊

  11. क्या खूब कही आपने
    इतना प्रेम भाई से

    1. Pragya Shukla

      🙏🙏

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