इन्सान नहीं कुछ बोलता
वक़्त हैं बोलता
बंदा कुछ नही
हालातों से घिरा हुआ
यह दिल है कुछ भरा हुआ
काफिला खट्टी-मीठी यादों का
छलकता पैमाना खुशियों का
दर्द भरे जज़्बातों का
समेटे कुछ आम – कुछ खास एहसासों का
पुलिंदा गलतियों का
नए पुराने किसी साज सा
उम्मीदों से बंधा हुआ
खवाबों से सजा हुआ
इन्सान बोले भी तो क्या बोले
नाच रहा किस्मत के हाथों
कठपुतली सा।
इन्सान
Comments
8 responses to “इन्सान”
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अति सुंदर
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धन्यवाद जी
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कवि अनु जी की इस कविता में दार्शनिक भाव समाहित है। सुन्दर और सरल अभिव्यक्ति वाह।
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धन्यवाद जी
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सुन्दर अभिव्यक्ति और सुंदर प्रस्तुति
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शुक्रिया जी
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बहुत खूब
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शुक्रिया जी
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