एक तरफ़ा प्यार – एक सच्चा ,अजीज़ एहसास

वो भी क्या दौर था

जवानी का पहला पहला साल था

इनायत थी परवरदिगार की

अचानक वो रूबरू हुआ था ।

पेहेली नजर में दिल दे बैठा था में शायद

फ़तेह पाली थी उसने मेरी रूह पे शायद

मुद्दतो बाद आया नया एहसास था वो शायद

एक तरफ़ा प्यार का आगाज़ हुआ था शायद ।

याद है मुझे उस शाम का वो तूफ़ान

हरे रंग का चूड़ीदार था उसका पेहरान

हुई थी उससे पेहेली जान पहचान

आने वाली जुदाई से पूरी तरहसे अनजान

बिना वजह मुस्कुराना अब आम था

दिल की रियासत पर उसीका नाम था

जाहिर करदु सारे राज इब यही में चाहता था

बया करदु मोहब्बत का पैगाम यही में सोचता था

मगर उस रोज मेने उसे रोते हुए देखा है

किसी की याद में सिसकते हुए देखा है

हैरत में था के हक़ीक़त खौफनाक है

मेरे ईद के चाँद का आसमा ही कोई और है

कैसे कहता के तकलीफ है मुझे

तेरे रफ़ीक से रश्क़ है मुझे

कैसे कहता के मोहब्बत है मुझे

एक तरफ़ा ही सही प्यार है मुझे

दिल ही तो टुटा था , पर वो दगाबाज तो न था

दूर ही तो गया था , पर वो बेवफा तो न था

चाँद का आसमान बदला था , पर उसका तसव्वुर तो था

मोहब्बत के बदले मोहब्बत मिले

ऐसा कोई दस्तूर नहीं होता

एक तरफ़ा प्यार में नूर न सही

मगर वो मजबूर नहीं होता

शायद में तुझे भूल जाऊ

पर ये एहसास जिन्दा रहेगा

एक तरफ़ा मेरे प्यार का

मिजाज जिन्दा रहेगा

Comments

7 responses to “एक तरफ़ा प्यार – एक सच्चा ,अजीज़ एहसास”

  1. Satish Pandey

    बहुत सुंदर भावाभिव्यंजना है। थोड़ा सा टाईपिंग मिस्टेक हुई है, जैसे- पेहेली (पहली), में (मैं), फतेह पाली थी (फतह पा ली थी),
    तरहसे(तरह से), उसीका (उसी का), करदु (कर दूं), मेने (मैंने), हैरत में था के (हैरत में था कि), टुटा था (टूटा था)।
    भाव दिल से निकले सुन्दर भाव हैं।

    1. Swapnil Satpute

      Thank you 😊😊👍👍

  2. Pratima chaudhary

    टाइपिंग मिस्टेक को अनदेखा करते हैं क्योंकि वो तो सबसे होती है मगर जो भाव आप ने प्रयोग किए हैं वो बहुत ही लाजवाब है
    ऐसे ही लिखते रहें,सर
    बस पोस्ट करने से पहले पढ़ लें अच्छे से ताकि मिस्टेक्स कम हो

    1. Swapnil Satpute

      Dhanyawaad aapka

  3. Prayag Dharmani

    बहुत बढ़िया

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