ओ याद! भूली बिसरी

आ बैठ पास मेरे
ओ याद! भूली बिसरी,
आ अश्रु! नैन में आ
या मुँह में आ जा मिश्री।
बीते पलों की खुशबू
तू उड़ कहाँ गई है,
ओ मन की लालसा तू
धुल कहाँ गई है।
बांधी थी जो सहेजे,
भर पोटली में यादें,
वो पोटली न जाने
खुल कहाँ गई है।
यादों में रह गई हैं
यादें थी जो पुरानी
उनमें भी कोई यादें
यादें कहाँ रही हैं।
खो जाओ मत यूँ यादो
आओ जरा बैठो,
रोऊँ, हँसूँ मैं तुम पर
आओ ना, बैठ जाओ।

Comments

7 responses to “ओ याद! भूली बिसरी”

  1. वाह, बहुत सुंदर कविता, very nice

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

    1. बहुत धन्यवाद

  2. Geeta kumari

    ओ याद! भूली बिसरी,
    आ अश्रु! नैन में आ
    या मुँह में आ जा मिश्री।
    __________ भूली हुई यादों को याद करने की कवि सतीश जी की बहुत सुंदर कविता ,सुंदर शिल्प और भाव सहित अति उत्तम लेखन

    1. इस सुन्दर समीक्षात्मक टिप्पणी हेतु बहुत बहुत धन्यवाद गीता जी। प्रेरक समीक्षा शक्ति का अभिवादन

  3. आ बैठ पास मेरे
    ओ याद! भूली बिसरी,
    आ अश्रु! नैन में आ
    या मुँह में आ जा मिश्री।
    बीते पलों की खुशबू
    तू उड़ कहाँ गई है,
    ओ मन की लालसा तू
    धुल कहाँ गई है।

    अपनी यादों का मानवीकरण किया है आपने

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