कलियों से सौंदर्य

बताओ ना! तुमने यह नूर कहाँ से पाया है?
फूलों से रंगत चुराई,
या फिर कलियों से नूर पाया है।
बताओ ना! तुमने यह नूर कहाँ से पाया है?
तितलियों से ली शरारत
या भंवरों से यह गुर पाया है।
बताओ ना! तुमने यह नूर कहाँ से पाया है?
शाखों से या पत्तियों से लचक पाई है
बताओ ना! तुम्हारे अंदर
यह अनुपम छटा कहाँ से आई है?
जो मेरी जान पर बन आई है।
बताओ ना! तुमने यह सौंदर्य कहाँ से पाया है?
फूलों से ली रंगत, या कलियों से नूर चुराया है।
बताओ ना तुमने यह सौंदर्य कहाँ से पाया है?

Comments

8 responses to “कलियों से सौंदर्य”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    मेरा मन कहता है
    गुर के जगह गूर हो तो रचना सरस के साथ साथ और मीठी हो जाएगी। सुन्दर अभिव्यक्ति

    1. सर गुर ही होता है

  2. बहुत बढ़िया

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