ओ !! प्रियतम मेरे
तू ही बता,
मेरा मन इतना
विचलित क्यों ?
मैं सच के पथ से
विचलित क्यों ?
जो दर्द उठाता कल तक
आवाज उठाता था कल तक
वह दर्द उठाना छोड़ा क्यों ?
कविता कहना छोड़ा क्यों ?
संसार की बातों में आकर
क्यों उल्टी-पुल्टी सोच रखी
इन आँखों में पर्दा रख कर
तेरी अच्छाई भूला क्यों ??
ओ !! प्रियतम मेरे
तू ही बता,
मैं सच के पथ से
विचलित क्यों ?
——- डॉ. सतीश पांडेय
कविता कहना छोड़ा क्यों ?
Comments
8 responses to “कविता कहना छोड़ा क्यों ?”
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प्रश्न अलंकार का प्रयोग।
कवि ने अपने ह्रदय में उठती उथल-पुथल को कविता के माध्यम से व्यक्त किया है।
तथा अनुप्रास अलंकार का प्रयोग-
धन्यवाद
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बहुत खूब
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धन्यवाद
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सुंदर रचना
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धन्यवाद
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बहुत ही सुन्दर
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धन्यवाद
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