कविता की समीक्षा

*******हास्य रचना******
जब कोई करता है,
मेरी कविता की बुराई,
आत्मा रोती है मेरी,
देती है रो-रो दुहाई।
मरहम सा लग जाता है,
उस वक्त…..
जब आती हैं समीक्षाएं,
दिल प्रसन्न हो उठता है।
देने लगता है दुआएं।।
_____✍️गीता

Comments

10 responses to “कविता की समीक्षा”

  1. Rakesh Saxena

    बहुत खूब
    कोई नासमझ ही होगा जो आपकी कविता की बुराई करेगा😊🙏

    1. Geeta kumari

      इस सुंदर समीक्षा हेतु आपका बहुत-बहुत धन्यवाद 🙏

  2. बहुत खूब
    कोई नासमझ ही होगा जो आपकी कविता की बुराई करेगा😊🙏

  3. बहुत ही शानदार रचना। हास्यपुट मुस्कुराहट बिखेरने में सक्षम है। कविता सरलता लिए हुए है। बहुत खूब

    1. Geeta kumari

      उत्साह वर्धन करती हुई इस उत्कृष्ट समीक्षा हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी,अभिवादन सर

    1. Geeta kumari

      बहुत-बहुत धन्यवाद कमला जी, हार्दिक आभार

  4. बहुत बढ़िया

    1. Geeta kumari

      बहुत-बहुत आभार सर 🙏

  5. कोई कविता की बुराई क्यों करेगा ?

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