*******हास्य रचना******
जब कोई करता है,
मेरी कविता की बुराई,
आत्मा रोती है मेरी,
देती है रो-रो दुहाई।
मरहम सा लग जाता है,
उस वक्त…..
जब आती हैं समीक्षाएं,
दिल प्रसन्न हो उठता है।
देने लगता है दुआएं।।
_____✍️गीता
कविता की समीक्षा
Comments
10 responses to “कविता की समीक्षा”
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बहुत खूब
कोई नासमझ ही होगा जो आपकी कविता की बुराई करेगा😊🙏-
इस सुंदर समीक्षा हेतु आपका बहुत-बहुत धन्यवाद 🙏
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बहुत खूब
कोई नासमझ ही होगा जो आपकी कविता की बुराई करेगा😊🙏 -
बहुत ही शानदार रचना। हास्यपुट मुस्कुराहट बिखेरने में सक्षम है। कविता सरलता लिए हुए है। बहुत खूब
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उत्साह वर्धन करती हुई इस उत्कृष्ट समीक्षा हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी,अभिवादन सर
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वाह वाह
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बहुत-बहुत धन्यवाद कमला जी, हार्दिक आभार
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बहुत बढ़िया
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बहुत-बहुत आभार सर 🙏
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कोई कविता की बुराई क्यों करेगा ?
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