कागज़ और कलम

कागज़,कलम की बातें सुनकर,
मैं लिखना सा भूल गई
कागज़ ने कहा कलम से,
जब तुम चलती हो मुझपे
कहो ये कैसा अहसास है,
कलम ने कहा……
हमें भी नहीं पता,
बस यही लगता है हमें
कि आप हमारे पास हैं..

*****✍️गीता

Comments

12 responses to “कागज़ और कलम”

  1. कवि गीता जी के द्वारा प्रस्तुत खूबसूरत भाव हैं। हृदयगत कोमल अनुभूति है यह। बहुत सुंदर शिल्प है।
    “कागज़ ने कहा कलम से”
    में कविता अनुप्रास से अलंकृत है। बहुत खूब

    1. Geeta kumari

      इतनी सुन्दर समीक्षा के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी
      कविता की सराहना के लिए बहुत बहुत धन्यवाद सर 🙏

    1. Geeta kumari

      Thank you Kamla ji🙏

  2. Virendra sen Avatar
    Virendra sen

    सुंदर अभिव्यक्ति गीता जी

    1. Geeta kumari

      Thank you virendra ji

    1. बहुत बहुत धन्यवाद पीयूष जी

  3. अति सुन्दर

    1. सादर धन्यवाद आपका सर 🙏

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद भाई जी🙏

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