क्या पता कमजोर भी

तुम्हारी बात पर
इतना कहेंगे आज हम,
काबिल हो तुम काबिल काबिल रहो
इससे नहीं नाराज हम।
लेकिन न समझो दूसरे को
भूल कर भी खुद से कम,
क्या पता कमजोर भी
सहसा दिखा दे अपना दम।

Comments

16 responses to “क्या पता कमजोर भी”

    1. सादर धन्यवाद जी

  1. अच्छी पंक्तियाँ

    1. धन्यवाद जी

  2. Virendra sen Avatar

    सत्य है, सुन्दर अभिव्यक्ति

    1. बहुत बहुत धन्यवाद जी

  3. Geeta kumari

    सत्य को बहुत सुंदर तरीके से प्रस्तुत किया है।

    1. सादर धन्यवाद जी

    1. सादर धन्यवाद जी

  4. मोहन सिंह मानुष Avatar

    बहुत ही
    सुन्दर प्रस्तुति

    1. धन्यवाद सर

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