कविता- खबर ले ले
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कोई तो हो खबर ले ले,
कहां थे अब तक-
यह सवाल पूछ ले,
वक्त का हिसाब मांगे,
साथ रहने का साथ मांगे,
हो फोन जब व्यस्त मेरा,
फोन पर ही दो बात कह दे,
वक्त गुजार रहे या,
औरों को वक्त दे रहें,
क्या बात है आजकल,
हमसे जो दूर हो रहें ,
रुठ जाए इसी बात पर,
उसे मनाने के लिए –
हम कई उपाय कर रहे,
पुरानी बातों को याद करके
पहले मिलन का वही गीत गा रहे,
नाराजगी दूर हो जाए,
पुराने पत्रों को हम चुम रहें,
हंसाने के चक्कर में
गाल पर एक चाटा मिला,
बेशर्म इंसान हो-
सुनने को यह शब्द मिला,
ठमक के नखरे के संग
बिस्तर पर लेट जाए,
बुद बुदाये क्रोध दिखाएं
कोई तो हो मुझसे रूठ जाए|कोई तो हो……
रूठ जाए हम उसे मनाए ,
प्यार में उसके गीत गाए,
सर दुख रहा है, तुम भी न खाओ,
कमरे से यह आवाज आए,
लाल किला कुतुब मीनार
ताजमहल की बात करूंगा,
शिमला रांची नैनीताल,
गोवा चलने की बात करूंगा,
सर पर हाथ फेर कर उसे मनाऊं,
पकड़ कर हाथ की उंगली उसे उठाऊं,
झटक दे हाथ मेरा-
फिर पास बैठ कर ,उसे मनाऊं
नाराजगी इतनी बड़ी हो जाए,
बिना गलती स्वीकार किए-
ना माफी पाऊं,
फिर उठे साथ चले
क्रोध पीकर प्यार दिखाएं,
कोई तो हो!
रूठे और मनाने का-
हमें भी अवसर दे जाए| कोई तो हो……..
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**✍ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’—
खबर ले ले
Comments
5 responses to “खबर ले ले”
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तन्हाई में लिखी गईं बेहद खूबसूरत पंक्तियां
कोई तो हो खबर ले ले…
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बहुत खूब
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आपकी कविता पढ़कर यही लगता है कि काश कोई होता….!!!!
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अतिसुंदर रचना
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कोई तो हो खबर ले ले,
कहां थे अब तक-
यह सवाल पूछ ले,
_______ बहुत खूब, कवि ऋषि जी की सुंदर अभिव्यक्ति
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