तान छेंड़ मुरली की गीत नया गा गया ( माधुर्य से अलंकृत )

तान छेंड़ मुरली की
गीत नया गा गया
मेरी झुर्रियों भरे
यौवन में कसाव आ गया
पपीहे पीह-पीह
बजने लगी जब
कान बीच
मृदंग बजे जीवन में
यों उछाल आ गया
मटकी धर सीस
चली कुंज गली राधिका
अधरों धर मुरली
प्रज्ञा’ मेरा श्याम आ गया
आज हुई प्रीत की जो
बात रात सपनों में
मुझको भी याद
मेरा प्रथम प्यार आ गया….

Comments

11 responses to “तान छेंड़ मुरली की गीत नया गा गया ( माधुर्य से अलंकृत )”

  1. तान छेंड़ मुरली की
    गीत नया गा गया
    मेरी झुर्रियों भरे
    यौवन में कसाव आ गया
    पपीहे पीह-पीह
    बजने लगी जब
    कान बीच
    मृदंग बजे जीवन में
    यों उछाल आ गया
    मटकी धर सीस
    चली कुंज गली राधिका
    अधरों धर मुरली…
    ध्वन्यात्मक, लयबद्ध कलात्मक माधुर्य पूर्ण रचना
    श्रीकृष्ण और गोपियों के प्रेम पर लिखी सुंदर कविता

    1. सुंदर समीक्षा हेतु ढेर सारा धन्यवाद

  2. सुंदर शब्दावली तथा शिल्प

    1. धज
      धज
      धन्यवाद

  3. अतिसुंदर भाव

    1. धन्यवाद आपका बहुत बहुत आभार व्यक्त करती हूँ

  4. Geeta kumari

    तान छेंड़ मुरली की
    गीत नया गा गया
    मेरी झुर्रियों भरे
    यौवन में कसाव आ गया
    ________ श्री कृष्ण और गोपियों पर लिखी हुई कवि प्रज्ञा जी की सुंदर रचना

  5. अद्धभुत अभिव्यक्ति

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