गाँव

‘गाँव में हाथ, कई हाथ थामे रखते हैं,
शहर में खींचने को सिर्फ पांँव होता है..
तरक्की कहने को कितनी ही की हो शहरों ने,
यूँ कुछ भी कह लो मगर गाँव, गाँव होता है..’

– प्रयाग

Comments

10 responses to “गाँव”

  1. Very nice line & thought

  2. मोहन सिंह मानुष Avatar

    बिल्कुल ,गांव में अब भी बहुत कुछ नहीं बदला
    सुन्दर अभिव्यक्ति

    1. Prayag Dharmani

      धन्यवाद सर

  3. himanshu ojha

    Very nice
    Please Meri Kavita “azaadi padhke bataeye kaise hai

  4. वाह क्या बात है

    1. धन्यवाद जी

    1. शुक्रिया जी

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