जज़्बाते – दिल

अजीब सी है ये ज़िन्दगी,
कभी, फूलों सी कोमल लगी।
कभी शमशीर की धार हुई,
दिल के जज्बातों को जब- जब किया बयां,
एक कविता हर बार हुई ।

Comments

16 responses to “जज़्बाते – दिल”

  1. बहुत बढ़िया, wow

    1. Geeta kumari

      Thank you 🙏

  2. वाह क्या बात है, सुन्दर अभिव्यक्ति

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद सर🙏

    1. Geeta kumari

      सादर धन्यवाद भाई जी 🙏

  3. बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद आपका सुमन जी

    1. Geeta kumari

      Thank you for your lovely comment Indu ji🙏

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत शुक्रिया जी 🙏

    1. Geeta kumari

      बहुत सारा धन्यवाद ईशा जी🙂

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत शुक्रिया आपका मोहन जी 🙏

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