खुशी हो या गमी संग नहीं रहती सदा
एक-दूसरे से मिलकर भी रहती जुदा-ज़ुदा
जुदा-जुदा
Comments
6 responses to “जुदा-जुदा”
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वाह वाह, क्या बात है। लेखनी में अदभुत क्षमता।
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सादर आभार
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क्या बात है बहुत ख़ूब
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सुंदर पंक्तियां
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अतिसुंदर
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ये तो धूप और छांव की तरह लाजमी होती है
बहुत सुंदर
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