तुमने रुला दिया मन
जाने की बात कहकर,
क्यों बोलते हो ऐसा
कह दो ना आज खुलकर।
अब तो हमारे मन में
स्थान बन चुके हो,
छोड़ा ना बीती बातें
बैठो ना अपने बनकर।
तुमने रुला दिया मन
Comments
22 responses to “तुमने रुला दिया मन”
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बहुत ही बढ़िया कविता
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धन्यवाद जी
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लाजवाब कविता
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सादर धन्यवाद
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सुन्दर अभिव्यक्ति
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सादर धन्यवाद
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दिलकश अंदाज में रचित रचना बहुत कुछ कह गयी पांडे जी।
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बहुत बहुत धन्यवाद
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बहुत खूब
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Thank you
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बहुत उत्तम
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सादर धन्यवाद जी
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अतिसुंदर
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सादर धन्यवाद
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सुन्दर प्रस्तुति
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सादर धन्यवाद सर
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कवि ने बहुत ही खूबसूरती से किसी अपने के लिए अपने मन की …. भावनाएं व्यक्त की है……. हृदय स्पर्शी रचना।
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इस बेहतरीन समीक्षा के लिए बहुत बहुत शुक्रिया गीता जी
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लाजवाब
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सादर धन्यवाद ऋषि जी
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Nice poem
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बहुत बहुत धन्यवाद
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