आज है कार्तिक मास की एकादशी है
तुलसी माँ का विवाह है…
मेंहदी लगाकर मौली चढ़ाकर
गोटे वाली चूनर ओढ़ाकर
माता का किया श्रृंगार है
आओ भक्तों मंगल गाओ
तुलसी माँ का विवाह है…
पैरों में माँ के महावर लगाकर
फूल-फल और हलवा पूरी का
तुलसी माता को भोग लगाकर
खाओ यह मंगल प्रसाद है..
तुलसी माँ का विवाह है…
“तुलसी माँ विवाह”
Comments
5 responses to ““तुलसी माँ विवाह””
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वाह, तुलसी माँ के विवाह का बहुत ही सुन्दर चित्रण किया है, प्रज्ञा जी ने अपनी इस कविता में। जय हो तुलसी माँ की
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धन्यवाद
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बहुत खूब, अति सुंदर कविता
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Tq
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अतिसुंदर रचना
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