“देवोत्थान एकादशी”

आषाण की एकादशी को
सभी देव सो जाते हैं…
और कार्तिक की एकादशी को
सभी देव जग जाते हैं…
इसीलिए इस दिन को
देवोत्थान एकादशी कहते हैं…
आज के दिन विष्णु जी
चारमास के बाद नींद से जागते हैं…
और आज के दिन तुलसी माता
का विवाह भी होता है..
इसीलिए आषाण से कार्तिक मास तक
कोई शुभ कार्य किया नहीं जाता है…
आज के दिन से हिन्दू धर्म में
विवाह होना प्रारम्भ हो जाता है…
देवोत्थान एकादशी की महिमा
बहुत निराली है..
गन्ने का मंडप बनाकर विष्णु जी
के पैर बनाकर की जाती है पूजा विधिवत्…
‘आओ देवा उंगली चटकाओ
नींद से जागो कृपा बरसाओ’
ऐसा बोला जाता है…
सिंघाड़ा, बेर, शकरकन्द चढ़ाकर
प्रभु को भोग लगाया जाता है…
“जय हो विष्णु जय हो तुलसी
जय हो सारे देवों की
आओ मेरे घर प्रभु पधारों
इच्छा पूर्ण करो हम भक्तों की”….

“देवोत्थान एकादशी की सभी को बधाई”

Comments

7 responses to ““देवोत्थान एकादशी””

  1. Virendra sen Avatar
    Virendra sen

    एकादशी के धार्मिक महत्व का खूबसूरत वर्णन किया है आपने।

  2. Geeta kumari

    देवोत्थान एकादशी की आपको भी बहुत सारी बधाई प्रज्ञा
    देवोत्थान एकादशी की महिमा का बहुत ही खूबसूरती से वर्णन कती हुई कवि प्रज्ञा शुक्ला जी की बेहद शानदार रचना

    1. धन्यवाद आपका

  3. सुन्दर अभिव्यक्ति, उम्दा लेखन

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