तू क्या है..

‘समझ में ये नही आता कि आरज़ू क्या है,
है दिल भी पास अगर फिर ये जुस्तजू क्या है..?

मैंने देखा है आज खून-ए-जिगर भी अपना,
मैं सबसे पूछता फिरता था के लहू क्या है..?

तू इतना वक्त पर पहुँचा कि बात खत्म हुई,
अब मुझसे पूछ रहा है के गुफ्तगू क्या है..?

मेरे वजूद पर सवाल उठाने वाले,
चल आज ये भी बता दे मुझे के तू क्या है..’

– प्रयाग

मायने :
जुस्तजू – तलाश
जिगर – कलेजा
गुफ्तगू – बातचीत

Comments

14 responses to “तू क्या है..”

  1. वाह जी वाह, लेखनी के इस प्रवाह की जितनी तारीफ की जाये कम है।

    1. इस हौसला अफजाई के लिए आपका शुक्रिया

  2. Geeta kumari

    वाह! बहुत ख़ूब ,कलम का कमाल है ये

    1. बहुत शुक्रिया आपका

  3. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    बेहतरीन

    1. जी शुक्रिया

    1. धन्यवाद आपका

    1. Prayag Dharmani

      बहुत शुक्रिया आपका

    1. Prayag Dharmani

      धन्यवाद आपका

  4. Pratima chaudhary

    बहुत सुंदर

  5. Prayag Dharmani

    आभार आपका

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