खबर नहीं कौन है वो, मेरा लगता है क्या,
मगर इतना करीब दिल के, कैसे करूं मैं बयां..
…✍️गीता
दिल के करीब
Comments
15 responses to “दिल के करीब”
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रहता है ❤️ के करीब ही
जब तक उसे न पता चले
बहुतों से जहां भरा पड़ा पता चलते ही प्यार का शोषन हुआ-
🙏🙏…. जहां न पहुंचे रवि, वहां पहुंचे कवि..
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यथार्थ इतना ख़ूबसूरत नहीं होता, जितनी कल्पना होती है…. समीक्षा के लिए बहुत बहुत धन्यवाद 🙏
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सुंदर
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धन्यवाद भाई जी🙏
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कोमल हृदय की सुंदर भावनाएं। कम शब्दों में वृहद भाव व्यक्त करती पंक्तियाँ, सैल्यूट योग्य हैं। जितना लिखती हैं, ठोस लिखती हैं, बहुत खूब
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सुन्दर और प्रेरक समीक्षा के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद सर…
आपकी समीक्षाएं भविष्य में भी लेखन के लिए प्रेरित करती हैं।🙏🙏
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अति सुंदर
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समीक्षा हेतु बहुत बहुत धन्यवाद आपका ऋषि जी 🙏
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Very nice
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Thanks sis
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लाजबाब
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Thank you sir🙏
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इस बीच आपकी लेखनी ने बहुत सुन्दर छठा बिखेरी है वाह
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आपकी इस टिप्पणी और प्रशंसा का हार्दिक धन्यवाद इन्दु जी 🙏
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