“देर तलक”

ღღ_कल फ़िर से दोस्तों ने, तेरा ज़िक्र किया महफ़िल में;
कल फ़िर से अकेले में, तुझे सोंचता रहा मैं देर तलक!
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कल फ़िर से तेरी यादों ने, ख़्वाबों की जगह ले ली;
कल फ़िर से मेरे यार, तुझे देखता रहा मैं देर तलक!
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कल फ़िर से तेरी गली में, भटकने की आरज़ू हुई;
कल फिर से एक बार, ख़ुद को रोकता रहा मैं!
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कल फिर से तेरा एहसास, मुझे छूकर गुज़र गया;
कल फिर से तेरी तलाश में, यूँ ही भागता रहा मैं!
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कल फिर से मैंने नींद से, वादा कियां था सोने का;
कल फिर नींद में “अक्स”, जागता रहा मैं देर तलक!!…..‪

#‎अक्स‬

Comments

6 responses to ““देर तलक””

  1. Ushesh Tripathi Avatar

    aapki language me simply amazing

    1. Ankit Bhadouria Avatar
      Ankit Bhadouria

      thank uuuuuuu bhai

  2. Avantika Singh Avatar
    Avantika Singh

    nice line

    1. Ankit Bhadouria Avatar
      Ankit Bhadouria

      shukriya Avantika ji

  3. राम नरेशपुरवाला

    Wah

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