धूप तो रहेगी।

मैंने बड़े प्यार से पूछा आज उससे
अगर मैं ना रहूं तो
मेरी कमी तुम्हें खलेगी ?
उसनें जवाब दिया-
बादल चाहे जितने हों पर धूप तो रहेगी।

Comments

10 responses to “धूप तो रहेगी।”

  1. बादल जितने भी हो पर धूप तो रहेगी।
    अर्थात जिंदगी में चाहे जितने भी दुख हो पर जिंदगी तो रहती है
    और उसे जीना भी पड़ता है कोई किसी के मर जाने पर स्वयं उसके लिए नहीं मर जाता
    बल्कि जीवन में सुख दुख आते जाते हैं दिन रात के सामान और उन्हें मनुष्य झूलता हुआ संघर्ष करता हुआ आगे बढ़ता है और रिश्ते सिर्फ स्वार्थ के मायने तक ही सीमित रह जाते हैं।
    आपने इन पंक्तियों में बहुत बड़ी बात करने की कोशिश की है

    1. मेरी कविता के बारे में इतनी सुंदर समीक्षा करने के लिए आपका बहुत-बहुत आभार मेरी कविता का भाव यही था जो आपने बताया है आलोचक का कार्य कविता का भाव व करना होता है जो आपने बखूबी किया है

  2. Satish Pandey

    पाठक को सकारात्मकता की ओर ले जाती सुन्दर पंक्तियाँ।
    “बादल चाहे जितने हों पर धूप तो रहेगी।”
    वाह वाह

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  4. सुन्दर अभिव्यक्ति

    1. Pragya Shukla

      धन्यवाद आपका बहुत बहुत आभार व्यक्त करती हूँ

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