“नववर्ष हो इतना सबल”

नववर्ष हो इतना सबल
ना पीर चारों ओर हो,
जिधर भी उठे नजर
सर्वत्र पुष्प ही पुष्प हो..
यह लेखनी अविराम हो,
हर पंक्ति में ऐसे भाव हों…
जाग जाए यह जमीं और
आसमां झुक जाए,
लेखनी हो तरुण-सी
ऐसा नववर्ष आए…
कोरोना की ना मार हो,
फूला-फला संसार हो…
दुर्गम हो, चाहे दुर्लभ हो,
हर पथ मानव को सलभ हो…
युवा हो कर्मठ और हाथ में
उनके पतवार हो,
ना डूबे कभी बहती रहे ऐसी
सुंदर नाव हो…
२०२० तो जलमग्न हो गया,
२०२१ सजकर आ गया…
सबके मनोरथ पूर्ण हो
सबका सुखी संसार हो…

Comments

9 responses to ““नववर्ष हो इतना सबल””

  1. Geeta kumari

    नव वर्ष पर बहुत सुंदर कविता ।
    नव वर्ष की बहुत-बहुत शुभकामनाएं

    1. धन्यवाद दी…
      मेरा हौसला बढ़ाने के लिए

  2. बहुत खूब लिखा है आपने
    नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें

    1. धन्यवाद आपका अनु..
      आपकी टिप्पणी ही मेरी प्रेरणा है

  3. बहुत ही सुंदर पंक्तियां लिखी हैं, नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ

    1. आपको पसंद आई यह मेरे लिए बड़ी बात है

  4. This comment is currently unavailable

  5. Satish Pandey

    सुन्दर अभिव्यक्ति

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