नूर महल

रौशनी से नहा रहा है आज नूर महल,
मुद्दत बाद निकला है चाँद मेरे शहर मे ।
ए फीज़ा तुझे है काली घटा की कसम,
नज़र न लगाना तू मेरे नूर महल में।।

Comments

8 responses to “नूर महल”

    1. Praduman Amit

      शुक्रिया पांडे जी।

  1. बहुत खूब

    1. Praduman Amit

      शुक्रिया गीता जी।

  2. खूबसूरत चित्र के साथ खूबसूरत कविता 

    1. Praduman Amit

      बस यही समीक्षा मेरी कलम को हौसला देती है।

      1. धन्यवाद आपका 

  3. बहुत सुन्दर 

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