रौशनी से नहा रहा है आज नूर महल,
मुद्दत बाद निकला है चाँद मेरे शहर मे ।
ए फीज़ा तुझे है काली घटा की कसम,
नज़र न लगाना तू मेरे नूर महल में।।
नूर महल

Comments
8 responses to “नूर महल”
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बहुत खूब
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शुक्रिया पांडे जी।
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बहुत खूब
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शुक्रिया गीता जी।
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खूबसूरत चित्र के साथ खूबसूरत कविता
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बस यही समीक्षा मेरी कलम को हौसला देती है।
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धन्यवाद आपका
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बहुत सुन्दर
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