पर्यावरण के दोहे

पर्यावरण बचाइए, हे मानव समुदाय
सुख समृद्धि शांति, का है जो पर्याय
नदिया पर्वत वन और, वन्य जीव समुदाय
मानव दानव से हमे, कोई लेव बचाय
धरा वायु जल सब हुए, दूषित सुनो पुकार
प्रकृति रोग वर्षा करे, जगत हुआ बीमार
प्रकृति अंग लकवा हुआ, दुखी नहीं संतान
वृद्धा आश्रम छोड़ कर, कहे जाप भगवान्
एटम बम के पालना, झूले राजकुमार
बापू गौतम बुद्ध की, सभा में हाहाकार
झरना नदिया बाग वन, पर्वत और पठार
रक्षा कर अस्तित्व की, कहत पुकार पुकार

Comments

6 responses to “पर्यावरण के दोहे”

  1. Ekta Gupta

    उत्तम अभिव्यक्ति

  2. सुन्दर रचना

  3. Geeta kumari

    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

  4. पर्यावरण पर सुंदर पंक्तियां

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