पवन हूँ चंचल

तूफ़ान तो नहीं हूँ
लेकिन पवन हूँ चंचल
तेरे आसपास चलकर
शीतल करूंगा पल-पल।
संगीतमय करूंगा
कविता से तेरा आँचल
उन्मुक्त खुशियाँ दूंगा
तोडूंगा गम के सांकल।

Comments

9 responses to “पवन हूँ चंचल”

  1. बहुत खूब बहुत शानदार

  2. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    बहुत खूब

  3. बहुत सुंदर

  4. Praduman Amit

    सुंदर प्रस्तुति।

  5. Geeta kumari

    वाह , बहुत ख़ूब । बहुत सुंदर पंक्तियां
    तूफान परेशान कर देता है,और ठंडी पवन सुकून देती है।
    वाह, इंदु जी कमाल का लेखन है👏👏

  6. शानदार रचना

  7. क्या बात है

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