पानी तूने धो दिये

पानी तूने धो दिये, बड़े बड़ों के दाग,
तब भी हो पाया नहीं, मेरा मन बेदाग,
मेरा मन बेदाग, नहीं कुछ साफ भाव हैं,
जूते भीतर कीच, सने गंदले पांव हैं,
कहे लेखनी खूब, रही कवि की नादानी,
जहां दाग थे वहाँ, नहीं पहुँचाया पानी।

Comments

9 responses to “पानी तूने धो दिये”

  1. बहुत शानदार छंदबद्ध रचनाएं लेकर प्रस्तुत हुए हैं सर, वाह।

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

  2. Geeta kumari

    कहे लेखनी खूब, रही कवि की नादानी,
    जहां दाग थे वहाँ, नहीं पहुँचाया पानी।
    ________मनुष्य की मन:स्थिति कभी कैसी होती है और कभी वैसी,उसी मन: स्थिति का यथार्थ चित्रण प्रस्तुत करती हुई छंद बद्ध शैली में बहुत सुंदर रचना

    1. इस उम्दा समीक्षा हेतु आपको बहुत बहुत धन्यवाद

  3. Seema Chaudhary

    बहुत उम्दा और श्रेष्ठ रचना

    1. सादर धन्यवाद

  4. आपकी इस प्रकार की छंदयुक्त लयबद्ध रचना मुझे बहुत अच्छी लगती है

    1. आपको बहुत बहुत धन्यवाद

  5. वाह,बहुत सुंदर भाव लिए छंद युक्त कविता

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