ओस की बूंद अब तुम भी
न दो यूँ ठेस पांवों में
अभी तो चुभ रहे हैं हम
कई पैनी निगाहों में।
पैनी निगाहों में
Comments
5 responses to “पैनी निगाहों में”
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वाह अति ही सुंदर
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बहुत सुंदर भवाभिव्यंजना हैं
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बढ़िया, वाह बहुत ही बढ़िया लिखा है
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बहुत ही सुंदर
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बहुत खूब
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