पैनी निगाहों में

ओस की बूंद अब तुम भी
न दो यूँ ठेस पांवों में
अभी तो चुभ रहे हैं हम
कई पैनी निगाहों में।

Comments

5 responses to “पैनी निगाहों में”

  1. वाह अति ही सुंदर

  2. Geeta kumari

    बहुत सुंदर भवाभिव्यंजना हैं

  3. बढ़िया, वाह बहुत ही बढ़िया लिखा है

  4. बहुत ही सुंदर

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