बचपन के दिन…..

वो भी क्या उमर थी,जब मस्ती अपने संग थी ,

सारी फिकर और जिम्मेदारियाँ, किसी ताले मे बंद थी,

वो गलियाँ जिसमे खेलते थे क्रिकेट,पतंग उड़ाते कभी थे,

कभी तोड़ते थे कांच तो कभी पेंच लड़ाते वो हम थे,

क्या सच में वो दिन थे बचपन के ?

बारिश मे भीगना ,क्लासेस बँक करना ,

कीचड़ के पानी मे खुद को भिगोना,

छत पे खड़े होके सीटी बजाना,

मोहल्ले मे अपनी शानो -शौकत दिखाना ,

क्या सच में वो दिन थे बचपन के ?

दोस्तों के साथ सारे-सारे दिन का बिताना,

गणपती की पूजा मे पंडाल सजाना,

विसर्जन मे ढोल की थाप पे थिरकना,

गप्पे लड़ाना, रूठना मनाना,हँसना हँसाना,

क्या सच मे वो दिन थे बचपन के?

रेट के टीले पे चढ़ना घरोंदे बनाना,

दोस्तों की मोहब्बत को अपना बताना,

किराये पे साइकिल लाकर दस मिनट ज्यादा चलाना,

गिर जाने पर कितनी चोट खाना,

क्या सच में वो दिन थे बचपन के ?

कभी भूली हुई तो कभी यादों की दस्तक,

गुजरे जमानों के पुराने पन्नों की हसरत ,

दादी नानी के वो बूढ़े मगर सपने सयाने,

अभी भी छुपे हैं वो नगमे सुहाने,

क्या सच मे वो दिन थे बचपन के ?

हाँ सच मे वो वही दिन थे बचपन के!!!

Comments

4 responses to “बचपन के दिन…..”

  1. Geeta kumari

    बहुत सुंदर

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