ज़िन्दगी तू ही बता..

“साँस लेता हूँ फकत ये भी कोई कम तो नही,
ज़िंंदगी तू ही बता मुझपे तू सितम तो नही..

कभी पूछा न ज़माने के शरीफ लोगों ने,
‘दीवाने ये बता कि तुझको कोई गम तो नही?’

किया हमने ही उसकी बात का ऐतबार मगर,
उसका कहना कोई वादा या फिर कसम तो नही..

क्यूँ खुदा तक नही पहुँची मेरी सदा अब तक,
दुआ मुझसे ही चली मुझपे ही खतम तो नही..

तेरी आँखों में यकीनन कुछ चुभ रहा होगा,
वरना अब तक तो हुई आँखे तेरी नम तो नही..’

– प्रयाग धर्मानी

मायने :
फकत – सिर्फ
सदा – आवाज़

Comments

12 responses to “ज़िन्दगी तू ही बता..”

  1. अतिसुन्दर, वाह

  2. Geeta kumari

    बहुत ही सुन्दर रचना

    1. Prayag Dharmani

      बहुत शुक्रिया आपका

    1. Prayag Dharmani

      शुक्रिया जी

    1. शुक्रिया जी

  3. बहुत खूब

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