आज फ़िर मेघा बरसे, रिमझिम – रिमझिम,
मन – मयूर नृत्य कर उठा, छ्मछम – छमछम।
ठंडी – ठंडी पवन चली है,
खिल उठे सारे वन – उपवन।
वृक्ष भी नाचें ,झूम – झूमकर,
लिपटी लताएं चूम – चूमकर,
गीत सुरीला गाती हैं।
बरखा ऋतु आने से आई ,नई कोंपल हर शाख
मेरे मन भी उठी उमांगें, छू लूं मैं आकाश।
बरखा ऋतु
Comments
21 responses to “बरखा ऋतु”
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सुन्दर अभिव्यक्ति और सुन्दर रचना प्रस्तुति
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बहुत सारा धन्यवाद प्रज्ञा जी
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Welcome sis
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Thank you
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सुंदर रचना
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शुक्रिया जी
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Beautiful
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Thank you
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शब्दों का आपने बहुत ही अच्छा ख्याल रखा है
यह गाने में रोचक हो जाता है
बहुत खूबसूरत कविता -
बहुत बहुत धन्यवाद आपका।🙏 आप की समीक्षाएं उत्साह वर्धन करती हैं।
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बहुत ही बेहतरीन
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बहुत बहुत धन्यवाद 🙏
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आपकी लेखनी बहुत ही बेहतरीन है। आपने सुन्दर रचना की है, यह विलक्षणता सदैव यूँ ही निखरती रहे
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बहुत आभार,🙏बस आप सब मित्रों का सहयोग यूं ही बना रहे।
Thanks for your pricious complement. -
Very Nice
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Thank you very much 🙏
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सुंदर चित्रण
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बहुत बहुत धन्यवाद आपका 🙏
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Great lines
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Thanks for your pricious complement Piyush ji 🙏
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