बरसात

गर्मी ऋतु के बाद मे, आती है बरसात
धरती उगती घास औ, तरु में आते पात
तरु में आते पात, दामिनी चहुँ दिश चमके
गिरती जल की बूँद, गगन में बादल दमके
कह पाठक कविराय, पवन शीतल सुखदाई
भर जाते जल श्रोत, गर्मी बाद मे आई

Comments

5 responses to “बरसात”

  1. Pragya

    बहुत भावपूर्ण रचना

  2. वर्षा ऋतु का सुंदर प्राकृतिक वर्णन करती हुई पाठक जी की बहुत ही उच्च कोटि की रचना

  3. बहुत सुंदर पंक्तियाँ

  4. अतिसुंदर रचना 

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