बारिश

मन किसी सूखी नदी सा हो रहा
आप कहती हो कि बारिश आ गई,
जो ये छींटे पड़ रहे हैं उनसे बस
एक सूनापन सा मन में गड रहा,
कब तलक यूँ ही घिरेगा आसमाँ
बूंदाबांदी ही रहेगी प्यार की,
कब तलक बिछुड़े रहेंगे आप हम
कब तलक बरसेगा खुलकर आसमाँ,
—————- Dr. सतीश पांडेय

Comments

11 responses to “बारिश”

  1. वाह जी वाह, saavan में सावन बरस रहा है, तो प्रेम की बारिश जरूर होगी.

  2. Satish Pandey

    Thanks

  3. Geeta kumari

    Nice lines

    1. Satish Pandey

      धन्यवाद जी

  4. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    बहुत उम्दा 🙏

    1. Satish Pandey

      धन्यवाद जी

  5. Sulekha yadav Avatar

    सुंदर रचना

    1. Satish Pandey

      धन्यवाद जी

  6. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    बेहतरीन

    1. Satish Pandey

      sadar dhanyvaad ji

  7. सावन के मौसम में सावन की बात हो अपने आप में बड़ी बात होती है आपकी रचना में प्रकृति का सुंदर वर्णन किया गया है

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