15 Comments

  1. तन्हाइयों में हृदय की तड़प का बहुत ही खूबसूरती से वर्णन किया गया है ..”. मुहब्बत की रेत फिसलने लगी है आजकल
    काजल आंखों का दुश्मन बन बैठा है”
    हृदय स्पर्शी पंक्तियां….।
    समुंदर में बहाकर ले जाने वाली पंक्ति ने तो कसम से जान ही निकाल दी प्रज्ञा। वेदना की पराकाष्ठा है ये रचना । बहुत अच्छा लिखती हो ।
    …..God bless you sis.

    1. बहुत बहुत आभार दी इतनी अच्छी समीक्षा के लिए
      आपको अच्छी लगी बस मेरा लिखना सफल हुआ…विरह, वियोग और वेदना यही मेरी खूबी है भाव दिल से निकलते हैं सीधे..

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