चपरासी पद की भर्ती में,
पीएचडी धारक आवेदक हैं,
एक अनार है सौ बीमार हैं,
जुगाड़ में बैठे पहरेदार हैं,
इस जुगाड़ के खेल ने सारी
प्रतिभाओं को निराश कर दिया,
बेकारी के रोग ने देखो,
युवाशक्ति को क्षीण कर दिया.
—– डा. सतीश पांडेय
बेकारी
Comments
14 responses to “बेकारी”
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एक अनार सौ बीमार बेहद गंभीर रचना पाण्डेय जी बहुत खूब
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सादर धन्यवाद
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लाजवाब, बहुत खूब
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धन्यवाद
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वाह वाह
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धन्यवाद जी
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आज के परिप्रेक्ष्य को दर्शाती बहुत सुंदर रचना है….एक अनार सौ बीमार वाली कहावत चरितर्थ होती दिखाई भी दे रही है । बहुत सुंदर
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सादर धन्यवाद
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सुन्दर
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आभार जी
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nice
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धन्यवाद जी
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यथार्थ को प्रदर्शित करती हुई सुंदर रचना आजकल यही हो रहा है युवा करे भी क्या पढ़ा लिखा तो है डिग्रियां तो है मगर नौकरी नहीं सरकार का ध्यान इस तरफ जाता ही नहीं हुआ तो गंदी राजनीति करने में लगी हुई है
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Thanks
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