होंठों की मुस्कान है बेटी
सबके घर की शान है बेटी
बेटा तो है कुल का दीपक
दो कुल का अभिमान है बेटी..
बेटी:- दो कुल का अभिमान
Comments
13 responses to “बेटी:- दो कुल का अभिमान”
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निश्चय ही बेटी दो कुल की शान है, पहचान है, बहुत खूब रचना।
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बहुत सुंदर पंक्तियां
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Very true pragya.
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आपका धन्यवाद
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आपका धन्यवाद
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बहुत खूब
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आपका धन्यवाद
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प्रज्ञा जी आपका बहुत-बहुत धन्यवाद इस लेखनी के लिए
कम शब्दों में आपने बहुत कुछ कह दिया-

आपका धन्यवाद
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अतिसुंदर
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आपका धन्यवाद
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बेहतरीन
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आपका धन्यवाद
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